उज्ज्वल भविष्य के लिये आवश्यक है समृद्ध वर्तमान और वर्तमान की समृद्धि निर्भर करती है अतीत के ज्ञान पर। अतीत के इस ज्ञान को ही “इतिहास” कहते हैं। इतिहास ही वर्तमान को प्रेरणा देता है कि उज्ज्वल भविष्य का मार्ग कैसे प्रशस्त हो। समय समय पर बुद्धिजीवि व्यक्ति और समाज इतिहास लेखन का कार्य करता आया है। इसी तथ्य को ध्यान में रखकर पिताजी ने मुझे ये लेखन कार्य करने की प्रेरणा दी।

21वी सदी अपने यौवन पर है और हमारा गाँव बंदला भी धीरे धीरे आधुनिकता को अपनाते हुए आगे बढ रहा हैहिमाचल प्रदेश का व्यासपुर (बिलासपुर) जिला जो कभी राजा आनन्दचन्द की रियासत हुआ करती थी, सात धारों ( पहाड़ियों) के समुच्च्य से मिलकर बना है। इन्ही सात धारों में से उंचाई में दूसरेरे पायदान पर आती है “धार बन्दला”। समुद्र तल से लगभग 1400 मीटर ऊंची ये धार एक ओर महर्षि वेद व्यास की तपोस्थली बिलासपुर तथा दूसरी ओर भगवान शिव से अमरत्व का वरदान प्राप्त करने वाले महर्षि मार्कन्डेय की तपोभुमि मारकन्ड गाँव के शीर्ष पर सदियो से अविचल खडी है।

भौगोलिक स्थिति एवम जलवायु

राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बिलासपुर द्वारा ईस्वी सन 2005 में करवाये गये सर्वे रिपोर्ट के अनुसार बंदला धार की लम्बाई लगभग 15-17 किलोमीटर है, जिसमे. मुख्य्त: बंदला, परनाली और सीहडा गाँव आते हैं। बिलासपुर शहर से लम्बवत उंचाई लगभग 2 किलोमीटर है। बन्दला गाँव बिलासपुर शहर की पूर्व दिशा में स्थित है। यह लगभग 31O  20’ 30” उत्तरी अक्षांश और 76 O 44’ 45” पूर्वी देशांतर के ऊपर स्थित है।

बंदला गाँव जिला मुख्यालय बिलासपुर से दो मार्गो से जुडा हुआ है। दोनो मार्गो से गाँव की दूरी क्रमश: 13 किलोमीटर और 25 किलोमीटर है। इस गाँव की एक विशेषता और है कि यह गाँव प्रदेश की राजधानी शिमला से भी सीधे मार्ग द्वारा जुडा हुआ है और शिमला की दूरी लगभग 81 किलोमीटर है। बंदला गाँव के शीर्ष पर खडे होकर प्रदेश के 7 जिले एक साथ देखे जा सकते हैं जिनके नाम बिलासपुर, हमीरपुर, सोलन, मंडी, शिमला, कांगडा और कुल्लु है।

बंदला गाँव की जलवायु उपोषण और शीतोषण प्रकार की है। गाँव में वार्षिक औसतन वर्षा लगभग 1400 मिलिमिटर होती है, जोकि मानसून आधारित है और 15 जून से 15 सितम्बर के बीच होती है। शरद ऋतु में वर्षा चक्रवात के द्वारा होती है। गाँव का तापमान ऋतु आधारित है जोकि ग्रीष्म ऋतु में अधिकतम 35- 38 O और शीत ऋतु में न्युंनतम शुन्य डिग्री तक जाता है। शीत ऋतु में सुर्योद्य 7:15-7:20 बजे के लगभग होता है जबकि ग्रीष्म और बरसात में सामान्यत: 6:15-6:30 बजे होता है।

प्राकृतिक वनस्पति एवम फसलें

बंदला धार में प्रकृति अपने अलग अलग रूप में वास करती है, अनेक वनस्पति एवम जडी बुटिया यहाँ उगते हैं। कई प्रकार के वृक्ष जैसे पीपल, बरगद, चीड, सफेदा, ख़ैर (कत्था), थीरा, सिम्बल, बियुल, सहतूत, बांस, आमला, दरेक, त्याम्ब्ली, दागुला, चूली, खिडक, सलाम्बडा, सिमटि, प्याजा, हरड, सिसम, लसुन्नी, आदि प्राकृतिक रूप से उगते हैं। इन वृक्षों के अलावा फलदार वृक्ष जैसे आम, केला, पपीता, अखरोट, आडू, नाशपती, गलगल, निम्बू, बादाम, अमरूद, जमहेरी, छोलंग, चकोतरा, लुकाठ, पलम, बेढा, अनार भी उगते हैं। अन्य वनस्पतियाँ जो सम्भवतः जडि बुटिया है, भी बंदला धार में उगती हैं जैसे तुलसी, मीठा नीम (दंगेला), तोमर (त्रिमिरेया), बेरी, दुस्सण, मलोरा, छिछडी, पतियुड, अलोवेरा, कड्वेया, विष ख़ापर, क्रोंदा, कसमुलु, अंजीर, आक, नुन्नु, गो कुचाल, भांग, येरन्ड, ख़जूर, छूर (कैक्ट्स), पाव्वर (द्राउग्ल्या), पुथ्थड घास, तम्बाकु, दुद्ली, परियुन्या, मैंन्दु, सरवाल, पशुओ के खाने का घास(मैथ, टंडोर, छ्न्जडी, कठीउण्या, लुंज, गुम्बरु, गन्ना घास, बरु), बग्गड, फर्न की पौधा, पतीउडीया, रुबडी, तूंग, गलेदरु, संसरबाय, छीक लेने का पौधा। इन प्राकृतिक वनस्पतियो के अलावा बंदला धार में मानसून आधारित खेती होती है। सीढीनुमा खेतों में अनेक प्रकार की फसलें उगायी जाती हैं, जैसे मक्का, गेहूँ, जौ, ऊडद दाल, रौगण, पर्ठ, सतरंगी दाल, राजमाह, सोयाबीन, गन्ना और सब्जियो में टमाटर, अदरक, गोभी, आलू, फ्रास्बीन, मेथी, मटर, मूली, गाजर, शलगम, खीरा, पालक, लेहसून,प्याज, कद्दु, लौकि, करेला, कुचालु (अरबी), सुरन, कटहल, गंड्यालि, तुरयि (कियु कंगेरि) मशरूम, शिमला मिर्च, मिर्च, भिंडि, हल्दी। सब्जियो के अलावा तिलहन में सरसो, तिल, तारामीरा, सोयावीन और अलसी की खेती होती है। मसालो में धनिया, सोआ, अजवायन, राई, जीरा, सौंफ भी निर्वाह खेती के रूप में उगाया जाता है। बंदला धार का टमाटर पूरे प्रदेश मे प्रसिद्ध है। बुजुर्गो से सुनते है की बंदला गाँव मे उगने वाली उड्द कि दाल भी बहुत मशहूर हुआ करती थी, प्रसिद्धि का स्तर इस बात से पता चलता है कि अगर बिलासपुर शहर् के साथ अन्य गाँव के बुजुर्गो से खाने की विशेष इच्छा पुछी जाती तो उत्तर मिलता था “बंदला के माह (उड्द की दाल खिला दो” । परन्तु आधुनिकता के साथ रासायनिक उर्वरको के प्रयोग के बाद अब उड्द की वो गुंणवत्ता नही होती या दूसरे शब्दों में कहें तो फसल ही नहीं होती।

जंगली जीव जंतु एवम पक्षी

बंदला धार के चारो ओर जंगल है जिसकी वजह से धार में और इसके आस-पास बहुत से जंगली जानवर और पक्षी पाये जाते हैं। जंगली जानवरो में बाघ, जंगली सुवर, हिरण, बंदर, लंगूर, खरगोश, जंगली गाय, कोरड (जंगली बकरी), काक्कड, कंड्रैलु, वन बिल्ला,  आदि जानवर पाये जाते हैं। इन जंगली जानवरो के साथ कई प्रकार के पक्षी जैसे मोर, तोता, चकोर, तितर, जंगली मुर्गा, गिद्ध, बाज, कौवा, सरैंटी (कैटल एग्रेट), फिंन्से, घुग्घी, उल्लु, कबुतर, बुलबुल, कराख, विभिन्न प्रकार की चिडिया, चई-चेपू, शिकरा आदि पक्षी बंदला धार में पाय जाते है। जंगली जंतुओ में गिलहरी, गिरगिट, गोह, सांप, नेवला और चूहा भी पाय जाते हैं।

परंतु ये उतना ही सच है कि आधुनिकता के दौर में विकास के लिये प्राकृतिक सन्साधनो का दोहन के नाम पर शोषण हो रहा है और ये तथ्य बंदला धार में भी सत्य प्रतीत होता है, जिसके परिणामस्वरूप प्राकृतिक वनस्पति, जीव जंतु विलुप्त होते जा रहे हैं, जो दुखद और चिंतनीय है।

बंदला धार एक अवलोकन

बन्दला धार में मुख्यत: चार गाँव आते हैं जिनके नाम हैं:

  1. बंदला
  2. परनाली
  3. सिहडा
  4. बद्सौर

इन चारो गाँव के कई उप- गाँव भी हैं जिन्हे “पालंगरी” के नाम से जाना जाता है।