मंत्र शक्ति विज्ञान: ध्वनि, चेतना और ऊर्जा का प्राचीन रहस्य

मानव सभ्यता के इतिहास में ध्वनि को केवल सुनने योग्य तरंग नहीं, बल्कि सृजन और चेतना का आधार माना गया है। Bhartiya परंपरा में “मंत्र” उसी ध्वनि-विज्ञान का सूक्ष्मतम रूप है, जिसे ऋषियों ने अनुभव, साधना और अवलोकन के माध्यम से विकसित किया। मंत्र शक्ति विज्ञान इस बात का अध्ययन है कि विशिष्ट ध्वनियाँ, उनके … Read more

संत रविदास: भक्ति, सम्मान और समाज में समानता का ऐतिहासिक दृष्टिकोण

भारतीय संत परंपरा में संत रविदास का नाम अत्यंत आदर, श्रद्धा और सम्मान के साथ लिया जाता है। उनकी वाणी केवल भक्ति या आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं है, बल्कि वह समाज को दिशा देने वाली, मानवीय मूल्यों को स्थापित करने वाली और व्यक्ति की आंतरिक क्षमता को पहचानने वाली वाणी है। संत रविदास ने … Read more

Why the English Calendar Is Less Exact Than the Hindu Calendar: A Scientific Perspective

Calendars are not just systems for marking dates; they are humanity’s attempt to align daily life with the movements of the cosmos. The English calendar, commonly known as the Gregorian calendar, is often perceived as scientifically accurate because it follows the Sun. However, a closer examination reveals that it is based on approximation rather than … Read more

मीनाक्षी शरण: स्मृति, कृतज्ञता और हिंदू चेतना के पुनर्जागरण की साधक

जब-जब कोई समाज अपने इतिहास, संस्कार और उत्तरदायित्व को भूलने लगता है, तब-तब उस पर संकट गहराने लगता है और यह सत्य भारत के इतिहास ने बार-बार प्रमाणित किया है। इसी ऐतिहासिक यथार्थ को स्मरण में लाने और भविष्य के लिए चेतना जगाने का संकल्प लिया है समाजसेवी, लेखिका और उद्यमी मीनाक्षी शरण ने, जिन्हें … Read more

वैद्य राजेश कपूर

वैद्य राजेश कपूर (जन्म: दिसंबर 1950, राजगढ़, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश) आयुर्वेद, गोविज्ञान, जैविक खेती, असाध्य रोग चिकित्सा, छात्र प्रतिभा विकास एवं सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के क्षेत्र में सक्रिय भारतीय वैद्य एवं प्रशिक्षक हैं। वे सेवा शिक्षण संस्थान (न्यास), जी.एम. के अध्यक्ष हैं। प्रारंभिक जीवन वैद्य राजेश कपूर का जन्म हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के … Read more

व्रत/ उपवास का वैज्ञानिक महत्व

उपवास का शाब्दिक अर्थ है, उप अर्थात् निकट और वास अर्थात् रहना। इस प्रकार उपवास का अर्थ हुआ भगवान के निकट रहना।

घंटनाद और शंखनांद का वैज्ञानिक प्रभाव

सनातन धर्म आधारित भारतीय परम्परायें पवित्र हैं और इनमे सम्मिलित प्रत्येक रीति-रिवाज का एक व्यापक वैज्ञानिक मूल्य और महत्व है। हमारी हिन्दू संस्कृति में पूजा पाठ का एक विशिष्ट महत्व है। जब भी घर में या मन्दिर में किसी भी प्रकार का पूजा-पाठ या अनुष्ठान होता है, तब घंटी अपरिहार्य रूप से बजाई जाती है। … Read more

हवन का दैनिक जीवन में वैज्ञानिक महत्व

हवन का दैनिक जीवन में वैज्ञानिक महत्व

यज्ञ और हवन सनातन धर्म (हिन्दू) परंपरा का एक महत्त्वपूर्ण भाग है। सनातन परंपरा के अनुयायी मूल रूप से अग्नि के उपासक रहे हैं। वेदों में ऋग्वेद का प्रथम शब्द ही अग्नि है ‘अ॒ग्निमी॑ळे पु॒रोहि॑तं य॒ज्ञस्य॑ दे॒वमृ॒त्विज॑म्। होता॑रं रत्न॒धात॑मम्।’ इसका अर्थ यह हुआ कि यज्ञ अग्नि-विज्ञान से जुड़ा है। शास्त्रों के अनुसार अग्नि पूजा का … Read more