त्रिवेणी घाट, नम्होल, बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश

मनाली या धर्मशाला से शिमला की ओर जाते हुए नम्होल नामक स्थान पर स्थित व्यासपीठ राजघाट से सिकरोहा की ओर लगभग डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर पांडव मंदिर स्थित है। इसके बाद लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर जोड़ेश्वर महादेव का देवस्थल आता है। जोड़ेश्वर महादेव से लगभग तीन किलोमीटर आगे प्रकृति की गोद में … Read more

धूणी पंजैल: बाबा गंगागिरी की तपोस्थली और भगवान दावींनाथ महाराज का पवित्र धाम

व्यासपीठ राजघाट नम्होल से सिकरोहा की ओर जाने पर कुछ दूरी पर पांडव मंदिर स्थित है। पांडव मंदिर से आगे जोड़ नामक स्थान आता है, जहाँ जोड़ेश्वर महादेव का मंदिर है। जोड़ से लगभग तीन किलोमीटर आगे त्रिवेणी घाट और वहाँ से लगभग चार किलोमीटर आगे धूणी पंजैल गाँव आता है। धूणी पंजैल में सड़क … Read more

सिद्धाश्रम बनाम कैलाश का ज्ञानगंज

वेद, उपनिषद्, रामायण, महाभारत, पुराण और योग-परंपरा के आलोक में एक शोधपूर्ण विश्लेषण “क्या हिमालय में सिद्धाश्रम अथवा ज्ञानगंज नामक कोई दिव्य एवं गुप्त आश्रम वास्तव में है ?”—यह प्रश्न भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में अत्यंत प्रसिद्ध है। अनेक आधुनिक पुस्तकों, साधु-संतों के संस्मरणों, वेबसाइटों और मौखिक परंपराओं में सिद्धाश्रम, ज्ञानगंज, शम्भला/शांगरी-ला को हिमालय या तिब्बत … Read more

वट सावित्री व्रत : अखंड सौभाग्य, नारी शक्ति और सनातन संस्कृति का महापर्व

इस दिन महिलाएँ अपना सोलह श्रृंगार करके वट वृक्ष अर्थात बरगद के पेड़ की पूजा विधि-विधान से करती हैं। साथ ही सावित्री माता और सत्यवान की कथा सुनती हैं।

मंत्र शक्ति विज्ञान: ध्वनि, चेतना और ऊर्जा का प्राचीन रहस्य

मानव सभ्यता के इतिहास में ध्वनि को केवल सुनने योग्य तरंग नहीं, बल्कि सृजन और चेतना का आधार माना गया है। Bhartiya परंपरा में “मंत्र” उसी ध्वनि-विज्ञान का सूक्ष्मतम रूप है, जिसे ऋषियों ने अनुभव, साधना और अवलोकन के माध्यम से विकसित किया। मंत्र शक्ति विज्ञान इस बात का अध्ययन है कि विशिष्ट ध्वनियाँ, उनके … Read more

संत रविदास: भक्ति, सम्मान और समाज में समानता का ऐतिहासिक दृष्टिकोण

भारतीय संत परंपरा में संत रविदास का नाम अत्यंत आदर, श्रद्धा और सम्मान के साथ लिया जाता है। उनकी वाणी केवल भक्ति या आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं है, बल्कि वह समाज को दिशा देने वाली, मानवीय मूल्यों को स्थापित करने वाली और व्यक्ति की आंतरिक क्षमता को पहचानने वाली वाणी है। संत रविदास ने … Read more

मीनाक्षी शरण: स्मृति, कृतज्ञता और हिंदू चेतना के पुनर्जागरण की साधक

जब-जब कोई समाज अपने इतिहास, संस्कार और उत्तरदायित्व को भूलने लगता है, तब-तब उस पर संकट गहराने लगता है और यह सत्य भारत के इतिहास ने बार-बार प्रमाणित किया है। इसी ऐतिहासिक यथार्थ को स्मरण में लाने और भविष्य के लिए चेतना जगाने का संकल्प लिया है समाजसेवी, लेखिका और उद्यमी मीनाक्षी शरण ने, जिन्हें … Read more