स्व. दौलत राम ठाकुर, गाँव बंदला, जिला बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश

दौलत राम ठाकुर हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के बंदला गाँव के निवासी थे। वे कृषक, पशुपालक और पारंपरिक ग्रामीण कौशल में दक्ष व्यक्ति थे। उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय खेती-बाड़ी, पशुपालन तथा सामाजिक कार्यों में बिताया। बंदला गाँव में तारकेश्वर (ताडकेश्वर) महादेव मंदिर के निर्माण तथा वहाँ आयोजित प्रथम अतिरुद्र महायज्ञ में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही। वे बंदला पंचायत में वार्ड पंच भी रहे।

प्रारंभिक जीवन और वंशावली

दौलत राम ठाकुर का जन्म हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के बंदला गाँव में हुआ था। उनके पिता स्व. नानकू राम ठाकुर और माता स्व. नानकी देवी थीं।

उनकी उपलब्ध वंशावली के अनुसार, उनके पूर्वजों में स्व. छज्जू राम, स्व. दल्लू राम, स्व. रीडकू राम और स्व. लेहवा राम का उल्लेख मिलता है। लेहवा राम के तीन पुत्र हुए:

  • स्व. श्री तखुआ राम
  • स्व. श्री भील राम
  • स्व. श्री रणीया राम

स्व. रणीया राम का विवाह स्व. कानो देवी के साथ हुआ था। उनके पुत्र स्व. नानकू राम ठाकुर हुए। कानो देवी का नाम कुरुक्षेत्र में बिलासपुर के पंडा के पास उपलब्ध पारंपरिक रिकॉर्ड में भी दर्ज बताया जाता है। उपलब्ध विवरण के अनुसार वे लगभग 75 से 80 वर्ष पूर्व अपने पति की परलोक गति के निमित्त पूजा कराने कुरुक्षेत्र गई थीं।

दौलत राम के पिता स्व. नानकू राम से पीछे की पीढ़ियों का विस्तृत इतिहास वर्तमान में उपलब्ध नहीं है। उपलब्ध वंशावली स्व. छज्जू राम से आगे तक जाती है। इस वंश की आठवीं पीढ़ी वर्तमान में चल रही है और दसवीं पीढ़ी के बच्चों का जन्म भी हो चुका है।

व्यक्तित्व

दौलत राम ठाकुर लंबे और हृष्ट-पुष्ट शरीर वाले व्यक्ति थे। उनका स्वभाव सरल, मिलनसार और सहज था। वे औपचारिक रूप से शिक्षित नहीं थे, लेकिन अपने पारंपरिक जीवन-कौशल और व्यावहारिक ज्ञान के लिए जाने जाते थे।

उनके जीवन का मुख्य आधार खेती-बाड़ी और पशुपालन था। वे खेतों और पशुओं से जुड़े कार्यों में अधिकांश समय व्यतीत करते थे। ग्रामीण जीवन की कठिन परिस्थितियों के बावजूद वे परिश्रम को जीवन का स्वाभाविक हिस्सा मानते थे।

पारिवारिक जीवन

दौलत राम ठाकुर का विवाह बिलासपुर जिले में नम्होल के निकट स्थित दगसेच गाँव की स्व. पार्वती देवी उपाख्य अनारकली देवी के साथ हुआ था।

दोनों के पाँच बच्चे हुए:

बच्चे

  1. श्री रामलोक ठाकुर
  2. श्री सुख राम ठाकुर
  3. श्री राम पाल ठाकुर
  4. श्रीमती सुनीता देवी
  5. श्रीमती गोदावरी देवी

परिवार के जीवन में उनकी पत्नी पार्वती देवी, बच्चों और बड़ी बहू निर्मला का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा।

आर्थिक स्थिति और संघर्ष

दौलत राम का परिवार प्रारंभ में अत्यंत निर्धन था। परिवार एक कच्चे मकान में रहता था, जिसकी छत सरवाड़ से बनी हुई थी। वर्षा के दिनों में छत से पानी टपकने पर घर के भीतर जगह-जगह बर्तन रखने पड़ते थे।

उन्होंने अपने परिश्रम, पत्नी, बच्चों और बड़ी बहू निर्मला के सहयोग से परिवार को कच्चे घर से पक्के मकान तक पहुँचाया। उस समय गाँव में पक्का मकान होना सामान्य बात नहीं थी।

पक्का मकान बनाने के लिए वे स्वयं हाथ में घन लेकर पत्थर तोड़ते थे। परिवार के अन्य सदस्यों के साथ वे पत्थरों को सिर पर ढोकर निर्माण स्थल तक पहुँचाते थे। इस प्रकार उनका घर उनके परिवार के सामूहिक श्रम और दीर्घकालीन संघर्ष का परिणाम बना।

पारंपरिक ग्रामीण कौशल

दौलत राम ठाकुर को पारंपरिक ग्रामीण निर्माण और हस्तकौशल का अच्छा ज्ञान था। वे उस समय कच्चे मकानों की सरवाड़ (सरवाल) से छत बनाने तथा घास का कुन्नु बनाने में दक्ष माने जाते थे।

वे हाथ से रस्सी बनाने और रस्सी से बनने वाली विभिन्न वस्तुओं को तैयार करने में भी कुशल थे। उनके ये कौशल उस समय के ग्रामीण जीवन में उपयोगी माने जाते थे, जब दैनिक जीवन की अनेक आवश्यक वस्तुएँ स्थानीय स्तर पर ही तैयार की जाती थीं।

वे भोजन बनाने में भी कुशल थे। गाँव में सामूहिक भोज होने पर कई बार उन्हें भोजन बनाने के लिए बुलाया जाता था।

बंदला पंचायत में भूमिका

दौलत राम ठाकुर बंदला पंचायत के वार्ड पंच भी रहे। वे गाँव के लोगों के साथ घुलने-मिलने वाले व्यक्ति थे और स्थानीय समाज में उनका सम्मान था।

खेती, पशुपालन और ग्रामीण कार्यों के साथ वे सामुदायिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहते थे।

तारकेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ाव

बंदला गाँव में वर्तमान में स्थित तारकेश्वर महादेव मंदिर के निर्माण में दौलत राम ठाकुर की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही।

मंदिर के निर्माण में उन्होंने अपने परिवार के साथ विभिन्न प्रकार से सहयोग किया। मंदिर में ताकेश्वर (ताड़केश्वर) नाम से शिवलिंग स्वरूप में विराजमान महादेव की प्राणप्रतिष्ठा के अवसर पर गाँव के इतिहास में आयोजित प्रथम अतिरुद्र महायज्ञ में उन्होंने सक्रिय रूप से श्रम किया।

यह यज्ञ बाबा नरोत्तम गिरी जी महाराज के मार्गदर्शन में हुआ था। दौलत राम ने यज्ञ में यजमान के रूप में भी भाग लिया।

बाबा नरोत्तम गिरी जी महाराज के ठहरने के लिए घास और खजूर के पत्तों से कुटिया बनाने में भी उन्होंने अपने साथियों के साथ श्रम किया। यज्ञशाला के निर्माण और उसकी घासफूस से बनी छत तैयार करने में भी उनका प्रत्यक्ष योगदान रहा।

कृषि और पशुपालन

दौलत राम ठाकुर का जीवन खेती और पशुपालन पर आधारित था। बंदला क्षेत्र में फसलों को बंदरों से बचाना किसानों के लिए एक नियमित चुनौती थी। वे स्वयं खेतों में रहकर फसलों की रखवाली करते थे।

बंदरों को भगाने के लिए पत्थर फेंकने के उद्देश्य से वे स्वयं रस्सी का करबाण (खरबैण) तैयार करते थे। वे कई बार पूरा दिन खेतों में बिताते और वहीं भोजन करते थे।

वर्षा के मौसम में खेतों के निकट पत्थरों से बनी छोटी झोंपड़ी में भी रहते थे। उन्हें कभी-कभी शौकिया तौर पर हुक्का, जिसे स्थानीय रूप में कली कहा जाता था, पीने की आदत थी।

बंदला का छिंज और मेला

बंदला गाँव में प्रतिवर्ष 24 और 25 जून को होने वाले छिंज और मेले में भी दौलत राम ठाकुर की सक्रिय भूमिका रहती थी।

उनके जीवन के अंतिम दिनों से इस मेले की एक विशेष स्मृति जुड़ी हुई है। अस्वस्थ रहने के दौरान उन्होंने अपने परिवार से कहा था कि “छिंज और मेला हर हाल में करना, चाहे मैं रहूँ या न रहूँ।”

उनका निधन मेले के सवाल वाले दिन, 24 जून 2016 को सवाल का प्रसाद ग्रहण करने के बाद हुआ। उनके निधन से मेले की पूर्व संध्या पर गाँव का वातावरण शोकमय हो गया। लोगों के बीच यह चर्चा होने लगी कि उनके निधन के कारण इस वर्ष मेला और छिंज नहीं हो पाएगा।

हालाँकि, उनके बड़े पुत्र रामलोक ठाकुर ने पिता के अंतिम संस्कार के बाद मेले और छिंज में भाग लिया। उसी रात स्व. दौलत राम की अस्थियों को, जिन्हें अंतिम संस्कार से पहले घर के आँगन में शहतूत के पेड़ पर टाँगकर रखा गया था, लेकर वे हरिद्वार के लिए रवाना हुए।

इस प्रकार एक ओर परिवार ने पिता के अंतिम संस्कार और संबंधित कर्मकांडों का निर्वहन किया और दूसरी ओर बंदला का परंपरागत मेला और छिंज भी आयोजित हुआ। यह प्रसंग परिवार की सामाजिक और धार्मिक परंपराओं के निर्वहन से जुड़ी एक विशिष्ट स्मृति के रूप में वर्णित किया जाता है।

निधन

स्व. दौलत राम ठाकुर का निधन 24 जून 2016 को हुआ। उनके निधन के समय बंदला गाँव में वार्षिक छिंज और मेले की तैयारियाँ चल रही थीं। उनके निधन के बाद भी उनकी इच्छा के अनुरूप मेला और छिंज आयोजित किया गया।

उनकी अस्थियाँ बाद में उनके बड़े पुत्र रामलोक ठाकुर द्वारा हरिद्वार ले जाकर संबंधित कर्मकांड संपन्न किए गए। पितृपक्ष में उनका श्राद्ध सप्तमी तिथि को पड़ता है।

विरासत

दौलत राम ठाकुर का जीवन हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण समाज में श्रम, आत्मनिर्भरता, पारिवारिक सहयोग और सामुदायिक जीवन से जुड़ा रहा। उन्होंने खेती और पशुपालन के साथ पारंपरिक ग्रामीण कौशल को अपने जीवन में बनाए रखा। बंदला के तारकेश्वर महादेव मंदिर के निर्माण और प्रथम अतिरुद्र महायज्ञ में उनका योगदान उनके जीवन से जुड़ी प्रमुख सामाजिक और धार्मिक स्मृतियों में शामिल है।

उनके परिवार में उनकी अगली पीढ़ियाँ आज भी उनके जीवन से जुड़ी स्मृतियों और पारिवारिक परंपराओं को संजोए हुए हैं।

वंशावली

स्व. छज्जू राम
↓
स्व. दल्लू राम
↓
स्व. रीडकू राम
↓
स्व. लेहवा राम
├── स्व. तखुआ राम
├── स्व. भील राम
└── स्व. रणीया राम
  + स्व. कानो देवी
  ↓
  स्व. नानकू राम ठाकुर
  + स्व. नानकी देवी
  ↓
  स्व. दौलत राम ठाकुर
  + स्व. पार्वती देवी उपाख्य अनारकली देवी
  ↓
  रामलोक ठाकुर | सुख राम ठाकुर | राम पाल ठाकुर | सुनीता देवी | गोदावरी देवी

स्व. दौलत राम ठाकुर, गाँव बंदला, जिला बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश

स्व. दौलत राम ठाकुर

– 24 जून 2016
जन्मस्थान = बंदला, बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश, भारत
निधन = 24 जून 2016
राष्ट्रीयता = भारतीय
व्यवसाय = कृषक, पशुपालक
धर्मपत्नी = पार्वती देवी उपाख्य अनारकली देवी
माता-पिता = नानकू राम ठाकुर और नानकी देवी
बच्चे = रामलोक ठाकुर, सुख राम ठाकुर, राम पाल ठाकुर, सुनीता देवी और गोदावरी देवी