राम पाल ठाकुर हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के बंदला गाँव के निवासी थे। वे सरकारी ठेकेदार कृषक, पशुपालक और समाजसेवी व्यक्ति थे। बंदला गाँव में तारकेश्वर (ताडकेश्वर) महादेव मंदिर के निर्माण तथा वहाँ आयोजित प्रथम अतिरुद्र महायज्ञ और बाद में शुरू हुए मेले और छिंज के आयोजन में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही। वे ग्राम सुधार समिति बंदला के अध्यक्ष भी थे।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
रामपाल ठाकुर का जन्म……….. हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के बंदला गाँव में हुआ था। उनकी सारी शिक्षा बंदला गाँव के स्कूल में ही हुई। बंदला स्कूल से उन्होंने दसवीं तक की शिक्षा अर्जित की थी। उन्होंने आधुनिक कृषि हेतु सिरमौर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र, धौलाकुआं से प्रशिक्षण भी लिया था।
वंशावली
स्व. रामपाल ठाकुर का जन्म हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के बंदला गाँव में हुआ था। उनके पिता स्व. दौलत राम ठाकुर और माता स्व. पार्वती देवी थीं। दोनों के पाँच बच्चे अर्थात् तीन लड़के और दो लडकियाँ हुईं।
बच्चे
- श्री रामलोक ठाकुर
- श्री सुख राम ठाकुर
- श्री राम पाल ठाकुर
- श्रीमती सुनीता देवी
- श्रीमती गोदावरी देवी
पाँच बच्चों में रामपाल तीसरे क्रमांक पर आते थे। उनकी उपलब्ध वंशावली के अनुसार, उनके पूर्वजों में स्व. छज्जू राम, स्व. दल्लू राम, स्व. रीडकू राम और स्व. लेहवा राम का उल्लेख मिलता है। लेहवा राम के तीन पुत्र हुए:
- स्व. श्री तखुआ राम
- स्व. श्री भील राम
- स्व. श्री रणीया राम
स्व. रणीया राम का विवाह स्व. कानो देवी के साथ हुआ था। उनके पुत्र स्व. नानकू राम ठाकुर हुए। कानो देवी का नाम कुरुक्षेत्र में बिलासपुर के पंडा के पास उपलब्ध पारंपरिक रिकॉर्ड में भी दर्ज बताया जाता है। उपलब्ध विवरण के अनुसार वे लगभग 75 से 80 वर्ष पूर्व अपने पति की परलोक गति के निमित्त पूजा कराने कुरुक्षेत्र गई थीं। नानकू राम के पुत्र रूप में दौलत राम ठाकुर का जन्म हुआ। दौलत के तीसरे पुत्र के रूप में रामपाल ठाकुर हुए। रामपाल ठाकुर इस वंश की नौवीं पीढ़ी वर्तमान में चल रही है और दसवीं पीढ़ी के बच्चों का जन्म भी हो चुका है।
व्यक्तित्व
रामपाल ठाकुर लंबे और हृष्ट-पुष्ट शरीर वाले व्यक्ति थे। उनका स्वभाव सरल, मिलनसार और सहज था। वे बहुत दिलेर व्यक्ति थे। लोगों की मदद करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते थे। वे कुश्ती भी लड़ते थे। गाँव की क्रिकेट टीम के सदस्य भी रहे। उन्होंने बंदला में भव्य क्रिकेट प्रतियोगिता के आयोजन भी किये। गाँव में होने वाले हर सामाजिक कार्य में वे बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते थे।
पारिवारिक जीवन
रामपाल ठाकुर का बचपन एक कच्चे मकान में बीता, जिसकी छत सरवाड़ से बनी हुई थी। वर्षा के दिनों में छत से पानी टपकने पर घर के भीतर जगह-जगह बर्तन रखने पड़ते थे। उन्होंने अपने परिवार का सहयोग किया और कच्चे घर से पक्के मकान तक की यात्रा की। उस समय गाँव में पक्का मकान होना सामान्य बात नहीं थी। अपने पिता और अन्य सदस्यों के साथ के साथ वे पत्थरों को सिर पर ढोकर निर्माण स्थल तक पहुँचाते थे।
राम पाल ठाकुर का विवाह बिलासपुर जिले में AIIMS के निकट स्थित चलैली गाँव की सुनीता देवी के साथ हुआ था। दोनों के पाँच बच्चे हुए:
बच्चे
- उषा देवी
- भारती
- आरती
- जागृति
- भारत
इनमें बड़ी बेटी उषा देवी का कोरोना काल के अंतिम चरण में निधन हो गया।
ठेकेदारी व्यवसाय और कृषि
शिक्षा प्राप्ति के बाद उन्होंने अपने बड़े भाई रामलोक ठाकुर के साथ ठेकेदारी व्यवसाय में हाथ बटाना शुरू कर दिया। कुछ समय के बाद उन्होंने अपना ठेकेदारी लाईसेंस बनवा लिया और स्वयं काम करने लगे। बिलासपुर जिला में कई जगह लोक निर्माण विभाग और जल विभाग के तहत कार्य किये। इसके साथ ही वे कृषि कार्य भी करते थे और अदरक तथा टमाटर की खेती भी करते थे।
तारकेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ाव
बंदला गाँव में वर्तमान में स्थित तारकेश्वर (ताडकेश्वर) महादेव मंदिर के निर्माण में अपने पिता दौलत राम ठाकुर की तरह रामपाल ठाकुर की भूमिका भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण रही। मंदिर के निर्माण में उन्होंने अपने परिवार के साथ विभिन्न प्रकार से सहयोग किया। मंदिर में ताकेश्वर (ताड़केश्वर) नाम से शिवलिंग स्वरूप में विराजमान महादेव की प्राणप्रतिष्ठा के अवसर पर गाँव के इतिहास में आयोजित प्रथम अतिरुद्र महायज्ञ में उन्होंने सक्रिय रूप से श्रम किया। यह यज्ञ बाबा नरोत्तम गिरी जी महाराज के मार्गदर्शन में हुआ था।
बंदला का छिंज और मेला
बंदला गाँव में प्रतिवर्ष 24 और 25 जून को होने वाले छिंज और मेले की शुरुआत करने में रामपाल ठाकुर ही सबसे पहले आगे आये थे। उन्होंने अपने मित्रों रूपलाल ठाकुर, किशोरी लाल ठाकुर, बाबुराम ठाकुर, सुरेश कुमार, नकलू राम आदि के साथ मिलकर अपने बड़े भाई रामलोक ठाकुर और पिता दौलतराम ठाकुर के मार्गदर्शन में मेला शुरू किया। आज ये मेला बहुत भव्य होता है और इसमें होने वाली छिंज (दंगल में) देशभर के पहलवान आते हैं।
निधन
2014 में कोग के पास एक दुर्घटना में उनका ..की आयु में निधन हुआ। पितृपक्ष में चौथी तिथि को इनका श्राद्ध आता है।
वंशावली
स्व. छज्जू राम
↓
स्व. दल्लू राम
↓
स्व. रीडकू राम
↓
स्व. लेहवा राम
├── स्व. तखुआ राम
├── स्व. भील राम
└── स्व. रणीया राम
+ स्व. कानो देवी
↓
स्व. नानकू राम ठाकुर
+ स्व. नानकी देवी
↓
स्व. दौलत राम ठाकुर
+ स्व. पार्वती देवी उपाख्य अनारकली देवी
↓
रामलोक ठाकुर | सुख राम ठाकुर | राम पाल ठाकुर | सुनीता देवी | गोदावरी देवी
सन्दर्भ
यह प्रामाणिक जानकारी स्व. राम पाल ठाकुर के परिवारजनों ने उपलब्ध कराई है।

- जोड़ेश्वर महादेव, गाँव साई, नम्होल, बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश - October 8, 2026
- स्व. उषा ठाकुर, गाँव बंदला, जिला बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश - October 8, 2026
- त्रिवेणी घाट, नम्होल, बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश - October 7, 2026